मातुलचन्द्र Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 15

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Class 6 Sanskrit Chapter 15 मातुलचन्द्र Summary Notes

मातुलचन्द्र Summary

प्रस्तुत पाठ एक बालगीत है। एक बालक विस्तृत नील गगन में चंदा मामा की ओर आकर्षित हो अनुरोध करता है कि चंदा मामा आएँ उस पर स्नेह बरसाएँ, उसे गीत सुनाएँ। चंदा मामा कहाँ से आते हैं, कहाँ जाते हैं-यह बात भी उसे अचंभे में डालती है।

मातुलचन्द्र Word Meanings Translation in Hindi

(क) कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?
कुत्र गमिष्यसि मातुलचन्द्र? अतिशयविस्तृतनीलाकाश:
नैव दृश्यते क्वचिदवकाशः कथं प्रयास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत्र आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
कुतः-कहाँ से (from where), आगच्छसि-आते हो (comes), मातुलचन्द्र!-हे चंदामामा! (Uncle Moon), कुत्र-कहाँ (where), गमिष्यसि-जाओगे (will go), अतिशयविस्तृतः-बहुत ज़्यादा फैला हुआ (spread out so far and wide), क्वचित्-कहीं भी (anywhere), प्रयास्यसि-जाओगे (will go), कथम्-किस प्रकार (how)।

अन्वय (prose-order):
मातुलचन्द्र! कुतः आगच्छसि? मातुलचन्द्र! कुत्र गमिष्यसि? नीलाकाशः अतिशयविस्तृत (अस्ति); क्वचिद् अवकाशः नैव (न+ एव) दृश्यते (हे) मातुलचन्द्र! (त्वं) कथं प्रयास्यसि? (हे) मातुलचन्द्र! (त्वम) कुतः आगच्छसि? सरलार्थ : हे चंदा मामा! तुम कहाँ से आते हो? कहाँ जाओगे? नीला आकाश बहुत दूर-दूर तक फैला हुआ है, कहीं खाली जगह (अवकाश:) नहीं दिखाई देता। चंदा मामा! तुम कैसे जाओगे? हे चंदा मामा तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
0 Uncle Moon! where do you come from, where will you go to? The blue sky is spread far and wide. O Uncle Moon! how will you go (travel) no open space is visible. O Uncle Moon, where do you come from?

(ख) कथमायासि न भो! मम गेहम्
मातुल! किरसि कथं न स्नेहम्
कदाऽऽगमिष्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings):
कथमायासि (कथम् + आयासि)-कैसे/क्यों आते हो? (how do you come?), भो-संबोधन सूचक अव्यय (a symbol for addresing with respect), गेहम्-घर (home), किरसि-बिखेरते हो (scatter/shower), स्नेहम्-स्नेह (affection), कदा आगामिष्यसि (कदाऽऽगमिष्यसि)-कब आओगे (when will you come)।

अन्वय (prose-order):
भोः कथम् मम गेहं न आयासि? मातुलः कथम् स्नेहं न किरसि? मातुलचन्द्र! (त्वं) कदा आगमिष्यसि?, मातुलचन्द्र! (त्वं) कुतः आगच्छसि? सरलार्थ आप मेरे घर क्यों नहीं आते हो? मामा! तुम स्नेह क्यों नहीं बरसाते हो? चंदा मामा! तुम कब आओगे? चंदा मामा! तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Why don’t you come to my house; O Uncle, why don’t you shower affection (onme). O Uncle Moon, when will you come? (I wonder)OUncle Moon, where you comefrom?

(ग) धवलं तव चन्द्रिकावितानम्
तारकखचितं सितपरिधानम्
मां दास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
धवलं-सफ़ेद (white), चन्द्रिकावितानम्-चाँदनी का फैलाव (extension of moonlight), तारकखचितम्-तारों से भरा (full of stars), सितपरिधानम्-सफ़ेद चादर/पहनावा (white robe), मह्यम्-मुझे/ मेरे लिए (me/for me)।

अन्वय (prose-order):
मातुलचन्द्र! तव चन्द्रिकावितानम् धवलम् (अस्ति); (किं त्वं) तारकखचितं सितपरिधानम् मह्यम् दास्यसि? मातुलचन्द्र! कुतः आगच्छसि? सरलार्थ तुम्हारी फैली हुई चाँदनी सफ़ेद है। तुम्हारा सफ़ेद वस्त्र/चादर तारों से भरा है। हे चंदा मामा, क्या तुम (यह वस्त्र) मुझे दोगे? हे. चंदा मामा, तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Your extension/pervasion of moonlight is white. Your white robe is studded with stars. O Uncle Moon! will you give (it) to me? Uncle Moon! where do you come from?

(घ) त्वरितमेहि मां श्रावय गीतिम्
प्रिय मातुल! वर्धय मे प्रीतिम्
किन्नायास्यसि मातुलचन्द्र?
कुत आगच्छसि मातुलचन्द्र?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :
त्वरितम्-जल्दी (quickly/fast), एहि-आओ (come), श्रावय-सुनाओ (make me listen), गीतिम्-गीत (song), वर्धय-बढ़ाओ (increcaselenhance), प्रीतिम्-प्यार (love/affection), किन्नायास्यसि (किम्+न+आयास्यसि)-क्या नहीं आओगे (will you not come)।

अन्वय (prose-order): प्रिय मातुल! (त्वम्) त्वरितम् एहि; माम् गीतिम् श्रावय; (त्वम्) में प्रीति वर्धय; मातुलचन्द्र! किं (त्वं) न आयास्यसि? मातुचन्द्र! कुतः आगच्छसि? सरलार्थ प्यारे मामा! जल्दी आओ, मुझे गीत सुनाओ, मेरा प्यार बढ़ाओ, चंदा मामा क्या तुम नहीं आओगे? चंदा मामा तुम कहाँ से आते हो?

English Translation:
Come quickly, sing a song for me, dear uncle, enhance my love (ie give me more love). O Uncle Moon, won’t you come? (I wonder) Uncle Moon! where do you come from?

अवधेयम्
(क) अकारान्त शब्दों में संबोधन एकवचन के रूप में विसर्ग नहीं लगता।
यथा- चन्द्र अथवा मातुल शब्द संबोधन में – ‘हे मातुल’ अथवा ‘हे मातुल चन्द्र’ होता है। अर्थात् उसमें विसर्ग नहीं लगता। इसी प्रकार–’बालक’ ‘मित्र’, ‘नर’, ‘छात्र’ आदि शब्द भी संबोधन
एकवचन में – हे मित्र! हे नर! हे छात्र! आदि होते हैं।

(ख) आकारांत, इकारांत, ईकारान्त, उकारांत शब्दों में भी संबोधन रूप ध्यातव्य है। यथा
मातुलचन्द्र Summary Notes Class 6 Sanskrit Chapter 15

 


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